SIR in UP: आठ दिन में सात BLO की गई जान, तब आया सात दिन समय बढ़ाने का फरमान

UP SSR: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों पर बढ़ता दबाव गंभीर चिंताओं को जन्म दे रहा है। मुरादाबाद में एक BLO सहायक शिक्षक ने कथित तनाव में जान दे दी, जबकि SSR कार्यों के दौरान सात कर्मचारियों की मौत दर्ज हुई है। लगातार बढ़ता कार्यभार अब बड़ा सवाल बन गया है।

SIR in UP: आठ दिन में सात BLO की गई जान, तब आया सात दिन समय बढ़ाने का फरमान

Special Summary Revision  in UP:   उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) पर बढ़ते कार्यभार का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। मुरादाबाद जिले में रविवार को एक 46 वर्षीय सहायक अध्यापक और BLO सर्वेश सिंह ने कथित रूप से तनाव के चलते फांसी लगाकर जान दे दी। यह घटना न केवल विभागीय दबाव का गंभीर मामला उजागर करती है, बल्कि SSR कार्यों में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और मानव संसाधन प्रबंधन पर भी गहरे सवाल खड़े करती है।

पहली बार BLO बने थे सर्वेश, नोट में लिखा,“मुझे समय कम मिला… नींद भी नहीं होती”

घटना मुरादाबाद जिले के बहेरी ब्रह्मपुरान गांव की है, जहां सर्वेश सिंह अपने घर में ही मृत पाए गए। परिवार में चार नाबालिग बेटियाँ हैं। उनकी तरफ़ से एक हस्तलिखित नोट मिला, जिसमें उन्होंने SSR कार्यों के लिए मिले कम समय और लगातार बढ़ते दबाव की बात लिखी। नोट में लिखा था: मैं पहली बार BLO बना हूँ। थोड़ा और समय मिलता तो काम पूरा कर देता। समय बहुत कम मिला है। बहुत तनाव में हूँ। तीन घंटे से ज्यादा नींद नहीं हो रही। मैं जीना चाहता हूँ, लेकिन दबाव बहुत है। सर्वेश को 7 अक्टूबर को BLO नियुक्त किया गया था और वे एक कम्पोजिट विद्यालय में तैनात थे। SSR के कार्यों में घर-घर जाकर सत्यापन, फॉर्म भरना, दस्तावेजों की जांच और समय सीमा में एंट्री करना शामिल है,जो अत्यधिक समय और ऊर्जा की मांग करता है।

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SSR कार्यों के दौरान सात BLO की मौत, तीन में आत्महत्या का संदेह

पिछले एक माह में SSR कार्य के दौरान कम से कम सात BLOs की मौत हुई है, जिनमें से तीन मामलों में आत्महत्या का संदेह जताया गया है। बाकी चार अधिकारियों की मौत हृदयाघात, ब्रेन हेमरेज और अन्य चिकित्सीय कारणों से हुई।
इस सिलसिले में यह तीसरा मामला है जो सीधे-सीधे SSR के दबाव से जुड़ा बताया जा रहा है।

अन्य आत्महत्या मामलों में भी दबाव का आरोप

1. फतेहपुर- शादी से एक दिन पहले लेखपाल ने की खुदकुशी

25 नवंबर को 27 वर्षीय लेखपाल सुधीर कुमार कुरिल ने कथित तौर पर शादी से ठीक एक दिन पहले जान दे दी। उनकी बहन ने आरोप लगाया कि 22 नवंबर की समीक्षा बैठक में सुधीर को SSR कार्य पूरा न करने पर कड़ी फटकार और धमकी दी गई,उसी शाम घर पर भी अफसरों ने उन्हें नौकरी से निकालने की चेतावनी दी।  शिकायत के आधार पर राजस्व निरीक्षक और एक अन्य व्यक्ति पर आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

2. गोंडा – शिक्षक विपिन यादव की मौत से पहले पत्नी ने रिकॉर्ड किया वीडियो

गोंडा जिले के जैतपुर मजहा गांव में तैनात सहायक शिक्षक विपिन यादव (35) की मौत भी SSR कार्य के दबाव से जोड़ी जा रही है। उनकी पत्नी द्वारा रिकॉर्ड एक वीडियो में विपिन कार्यभार और अधिकारियों के दबाव का जिक्र करते नजर आते हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने इसे घरेलू विवाद से जुड़ा मामला बताते हुए आधिकारिक रूप से दबाव के आरोपों से इनकार किया है। चार BLO की मौत मेडिकल कारणों से, SSR दबाव से जुड़ाव पर परिवारों के सवाल। 

1. बरेली – सर्वेश कुमार गंगवार (47), हृदय गति रुकने से मृत्यु

  • SSR ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मौत।

2. लखनऊ-विजय कुमार वर्मा (40), शिक्षामित्र, ब्रेन हेमरेज

  • 22 नवंबर को अचानक स्वास्थ्य बिगड़ा और मौत हो गई।

3. देवरिया- रंजू दुबे (44), शिक्षामित्र, हार्ट अटैक

  • 25 नवंबर को अचानक सीने में दर्द और फिर निधन।

4. बिजनौर – शोभा रानी (56), आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, हार्ट अटैक

  • 29 नवंबर को SSR कार्य के बीच में मृत्यु।

परिजनों का कहना है कि SSR कार्य में प्रतिदिन लंबी दूरी पैदल चलना, दस्तावेजी सत्यापन और समय पर डेटा एंट्री के दबाव ने उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव डाला।

एसएसआर अभियान में BLO पर बोझ क्यों बढ़ रहा है

  • SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन वह वार्षिक प्रक्रिया है जिसमें
  • नए मतदाताओं का पंजीकरण
  • मृतक मतदाताओं के नाम हटाना
  • पते बदलने वालों का संशोधन
  • घर-घर सत्यापन
  • फॉर्म 6, 7, 8, 8A की प्रक्रिया

निर्धारित समय सीमा में डिजिटल एंट्री जैसे जटिल कार्य होते हैं।

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उत्तर प्रदेश में BLO सामान्यतः

  • शिक्षक
  • लेखपाल
  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
  • पंचायत कर्मचारी
  • शिक्षामित्र होते हैं,जिनके पास पहले से ही नियमित कार्यभार होता है।
  • SSR के दौरान
    रोजाना लक्ष्यों का दबाव,
    समय कम,
    घर-घर सर्वे
    मोबाइल ऐप पर तत्काल फीडिंग
    शाम तक रिपोर्टिंग

जैसे काम BLO पर शारीरिक और मानसिक बोझ डालते हैं।

अक्सर BLO को

  • विभागीय बैठकों में फटकार
  • चेतावनी
  • निलंबन की धमकी
  • जैसे व्यवहार का सामना भी करना पड़ता है।

परिजनों, शिक्षकों और संगठनों ने उठाए सवाल

सर्वेश सिंह की मौत के बाद परिजनों और साथी शिक्षकों का कहना है कि SSR कार्य के लिए प्रशिक्षण अपर्याप्त था.काम का दबाव सीमा से बाहर था। समय अत्यंत कम दिया गया .

कई BLO दिन में 10–12 घंटे काम कर रहे थे

  • शिक्षक संगठनों ने मांग उठाई है कि
  • SSR कार्य के लिए स्पष्ट मानव संसाधन नीति बने
  • BLO को पर्याप्त सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिले
  • अत्यधिक कार्य दबाव और धमकियों को रोका जाए
  • BLO की मौतों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए

राज्य चुनाव आयोग की चुप्पी बरकरार

घटनाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने अब तक BLO की मौतों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। परिवारों और संगठनों का कहना है कि SSR कार्य के दौरान हुए हादसों को ड्यूटी डेथ,ऑन-ड्यूटी हादसा के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए ताकि आश्रितों को उचित सहायता मिल सके।

Original Source - Patrika Live News

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