‘इक्कीस’ में धर्मेंद्र को कास्ट करें या नही? संकोच में थी टीम, लगा था अब उनका कोई महत्व नहीं रहा…
Dharmendra Cast In Ikkis: फिल्म इक्कीस धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म थी। जो वह देख नहीं पाए, अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। धर्मेंद्र को इक्कीस में कास्ट करने को लेकर काफी बातचीत हुई थी। टीम के लोगों का लगा था कि उनका महत्व अब खत्म हो गया है। इसलिए उन्हें लेने में संकोच कर रहे थे।
Dharmendra Cast In Ikkis: बॉलीवुड के हीमैन कहे जाने वाले एक्टर धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को हुआ था। उनके निधन के बाद इंडस्ट्री के लिए वह सोमवार को दिन एक काला दिन बन गया था। पूरा देओल परिवार और उनकी दूसरी पत्नी हेमा मालिनी अब तक इस बड़े दर्द से निकल नहीं पाए हैं। वहीं,धर्मेंद्र का सपना था कि वह जब दुनिया से अलविदा कहें तो काम करते रहे और हुआ भी कुछ ऐसा ही धर्मेंद्र का जब निधन हुआ वह फिल्म इक्कीस की शूटिंग पूरी करके ही हटे थे और जब वह फिल्म कर रहे थे तो भी उनकी तबीयत ठीक नहीं थी।
अब फिल्म रिलीज हो चुकी है, इसमें धर्मेंद्र की एक्टिंग को बेहद पसंद भी किया गया है, लेकिन अब एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें सामने आया है कि फिल्म इक्कीस में धर्मेंद्र को लेना चाहिए या नहीं कई लोग संकोच में थे।
इक्कीस में धर्मेंद्र को करें कास्ट या नहीं संकोच में थे लोग (Dharmendra Cast In Ikkis)
फिल्म की राइटर पूजा लधा सूर्ति और अरिजीत बिस्वास ने एक इंटरव्यू में बताया कि शुरुआत में धर्मेंद्र को फिल्म में लेने को लेकर टीम में काफी चर्चा हुई थी। पूजा ने खुलासा किया, “कुछ लोगों को लगा था कि धर्मेंद्र जी अब पुराने हो चुके हैं और इंडस्ट्री में उनका पहले जैसा महत्व नहीं रहा। लेकिन फिल्म के डायरेक्टर श्रीराम राघवन पूरी तरह श्योर थे कि इस किरदार को सिर्फ धरम जी ही निभा सकते हैं। हम सब उनके फैन रहे हैं और आज उनके जाने का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”

इक्कीस की स्क्रिप्ट में किए थे धर्मेंद्र ने बदलाव (Dharmendra Last Film Ikkis)
फिल्म के कई ऐसे सीन है जिन्हें धर्मेंद्र ने अपने निजी अनुभवों से संवारा था। एक सीन में उनका किरदार (मदन लाल) अपने पिता को याद करता है। पूजा ने बताया, “यह आइडिया पूरी तरह धर्मेंद्र जी का था। उन्होंने हमें बताया कि पंजाब में उनके पिता के घर के पास एक नीम का पेड़ था और उन्हें लगता था कि वह उस पेड़ की सरसराहट में अपने पिता की आवाज सुन सकते हैं। हमने स्क्रिप्ट में यह बदलाव किया और जब उन्हें वह सेट दिखाया गया, तो वह बच्चों की तरह खुश हो गए थे।”
इसी तरह, एक सीन में पाकिस्तानी ऑफिसर मदन लाल को गाली देता है, लेकिन वह पलटकर जवाब देने के बजाय उसे गले लगा लेते हैं। यह भावुक सीन भी धर्मेंद्र का ही सुझाव था, जिसे श्रीराम राघवन ने तुरंत मान लिया।

अधूरी रह गई फिल्म देखने की हसरत
धर्मेंद्र अपनी इस आखिरी फिल्म को लेकर काफी ज्यादा खुश थे। अफसोस की बात यह है कि वह पूरी फिल्म नहीं देख पाए। डायरेक्टर श्रीराम राघवन ने बताया कि उन्होंने धरम जी को आधी फिल्म दिखा दी थी, लेकिन फिल्म के फाइनल कट से पहले ही वह दुनिया छोड़ गए। श्रीराम को आज भी इस बात का मलाल है कि वह अपने चहेते कलाकार को उनकी आखिरी मेहनत का पूरा परिणाम नहीं दिखा सके।
Original Source - Patrika Live News
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