UP Politics: मायावती पर आपत्तिजनक पोस्ट से मचा सियासी तूफान, लखनऊ पुलिस की कार्रवाई में श्रेया यादव फंसी

UP Politics Update: लखनऊ में बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कृष्णा नगर थाने में श्रेया यादव नामक महिला के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।

UP Politics: मायावती पर आपत्तिजनक पोस्ट से मचा सियासी तूफान, लखनऊ पुलिस की कार्रवाई में श्रेया यादव फंसी

UP Politics Update Social Media Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में कांग्रेस, सपा-बसपा गठबंधन और राजनीतिक दलों के बीच एक नया विवाद उभर गया है। कृष्णा नगर कोतवाली पुलिस स्टेशन में श्रेया यादव नामक एक महिला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिस पर आरोप है कि उसने फेसबुक पर मायावती के खिलाफ “आपत्तिजनक,” “अभद्र” और “अपमानजनक” भाषा का उपयोग किया था।

मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणी से बवाल

यह मामला सोमवार शाम आलमबाग स्थित दामोदर नगर इलाके में बसपा कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान सामने आया। कैंट विधानसभा प्रभारी देवेश कुमार गौतम के आवास पर आयोजित बैठक में बसपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता फेसबुक पर एक पोस्ट देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें श्रेया यादव नामक फेसबुक आईडी से बनाई गई एक टिप्पणी दिखाई दी, जिसमें पार्टी के मुताबिक मायावती के प्रति अपमानजनक और अस्वीकार्य भाषा का उपयोग किया गया था।

क्या था विवादित कमेंट और क्या आपत्ति जताई गई

बैठक में मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उक्त टिप्पणी में न केवल राजनीतिक आलोचना थी, बल्कि भाषा इतनी “भद्दी” और “आपत्तिजनक” थी कि इससे बसपा सुप्रीमो आहत हुई हैं और समर्थकों की भावनाएँ भी ठेस पहुंची हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति इस प्रकार के शब्दों का उपयोग सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है तथा इससे राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरता है।

बीएसपी कैंट विधानसभा अध्यक्ष गंगाराम वर्मा ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि 9 फरवरी की दोपहर लगभग 4 बजे यह कमेंट देखा गया था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियाँ राजनीतिक माहौल को बिगाड़ सकती हैं और भलाई की बजाय नफरत और विभाजन फैला सकती हैं।

श्रेया यादव कौन हैं

श्रेया यादव की फेसबुक प्रोफाइल पर करीब 50,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं और वह स्वयं को समाजवादी पार्टी (SP) की सक्रिय सदस्य बताती हैं। बसपा समर्थकों का आरोप है कि एक जिम्मेदार दल की सदस्य द्वारा वरिष्ठ विपक्षी नेता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना अत्यंत निंदनीय है। हालांकि, श्रेया किसी नेत्रहीन बयान नहीं दिया है और न ही इस बारे में उन्होंने मीडिया के सामने अपनी सफाई रखी है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

कृष्णा नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी रूप से फेसबुक आईडी की सत्यता और कमेंट की वास्तविकता के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और जरूरत पड़ने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी अनुरोध किया जाएगा। यदि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और माहौल

इस घटना ने राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर गर्मी ला दी है।  BSP समर्थकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर आक्रामक और अपमानजनक टिप्पणियाँ रोकने के लिए सख्त कानूनी उदाहरण पेश किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। वहीं, अन्य राजनीतिक दलों से भी इस मामले पर प्रतिक्रियाएँ मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि यह केवल एक व्यक्तिगत मामले नहीं रह गया बल्कि राजनीतिक गहमागहमी का विषय बन गया है।

पिछले कुछ वर्षों में मायावती पर दी गई टिप्पणियों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, जहां विभिन्न दलों के नेताओं ने आलोचनात्मक बयान दिए थे और उनका असर राजनीति पर पड़ा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि मायावती जैसे वरिष्ठ नेता के प्रति कही भी गई टिप्पणी न केवल राजनीति में महत्व रखती है बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और राजनीतिक आचार-संहिता पर भी सवाल उठाती है।

सोशल मीडिया और राजनीतिक जिम्मेदारी

समय के साथ सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का एक मुख्य मंच बन गया है, जहां लाखों लोग अपनी राय साझा करते हैं। वहीं, इस मंच पर अभद्र या अपमानजनक टिप्पणियाँ कभी-कभी कानून की सीमा के भीतर नहीं आतीं। कानून के तहत भी धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक विभाजन फैलाने वाली टिप्पणियाँ अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं और उस पर कार्रवाई भी हो सकती है। इस मामले ने यही प्रश्न उठाया है कि क्या राजनीतिक मतभेद सोशल मीडिया पर इस हद तक बढ़ने चाहिए कि कानून को हस्तक्षेप करना पड़े।

Original Source - Patrika Live News

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