यूपी रेरा सख्त: अनरजिस्टर्ड बिल्डरों पर कार्रवाई, घर खरीदारों को बड़ी राहत
यूपी रेरा ने अनरजिस्टर्ड बिल्डरों पर सख्ती बढ़ाते हुए नई व्यवस्था लागू की है, जिससे ठगी के शिकार घर खरीदारों को शिकायत दर्ज कर न्याय पाने में अब आसानी होगी।
UP RERA: उत्तर प्रदेश में मकान और प्लॉट दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले अनरजिस्टर्ड बिल्डरों पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने ऐसे बिल्डरों के खिलाफ शिकंजा कसने के लिए नई व्यवस्था लागू की है, जिससे पीड़ित खरीदारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सके।
अक्सर देखा गया है कि कई बिल्डर बिना रजिस्ट्रेशन के ही प्रोजेक्ट लॉन्च कर देते हैं और आकर्षक ऑफर देकर लोगों को निवेश के लिए लुभाते हैं। बाद में या तो प्रोजेक्ट अधूरा रह जाता है या खरीदारों को उनके पैसे वापस नहीं मिलते। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को लंबे समय तक न्याय के लिए भटकना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यूपी रेरा ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
नई व्यवस्था के तहत अब अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों में भी खरीदार अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे। पहले ऐसी शिकायतों के निस्तारण में कई तकनीकी बाधाएं आती थीं, लेकिन अब प्रक्रिया को सरल और अधिक प्रभावी बनाया गया है। इससे पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद है।
यूपी रेरा द्वारा तैयार की गई इस नई प्रणाली में शिकायत दर्ज करते समय खरीदारों को अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के प्रमोटर्स और प्रोजेक्ट से संबंधित अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें प्रोजेक्ट का स्थान, प्रमोटर का नाम, संपर्क विवरण, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी साक्ष्य शामिल होंगे। इससे प्राधिकरण को मामले की जांच में आसानी होगी और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित प्रमोटर को नोटिस जारी किया जाएगा। इस नोटिस के माध्यम से उसे अपने प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए जाएंगे। यदि प्रमोटर इन निर्देशों का पालन करता है, तो उसे नियमों के तहत अपने प्रोजेक्ट को वैध रूप से संचालित करने का अवसर दिया जाएगा।
हालांकि, यदि कोई प्रमोटर रेरा के निर्देशों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जुर्माना बिल्डरों के लिए एक बड़ा आर्थिक दंड साबित हो सकता है, जिससे वे नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।
इतना ही नहीं, यदि इसके बावजूद भी प्रमोटर आदेशों का पालन नहीं करता, तो उस पर अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा और अधिकतम तीन साल तक की सजा का भी प्रावधान है। यह सख्ती इस बात का संकेत है कि सरकार अब रियल एस्टेट सेक्टर में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। लंबे समय से घर खरीदारों को धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे इस क्षेत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे थे। अब इस नई व्यवस्था से स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट जानकारों का कहना है कि खरीदारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वह रेरा में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए यूपी रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्रोजेक्ट की जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। यह एक छोटा सा कदम बड़े नुकसान से बचा सकता है।
इसके अलावा, खरीदारों को सभी भुगतान बैंकिंग माध्यम से ही करना चाहिए और हर लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। इससे भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में उनके पास ठोस प्रमाण मौजूद रहेंगे।
नई व्यवस्था से यह भी उम्मीद की जा रही है कि अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स की संख्या में कमी आएगी। बिल्डरों पर सख्ती बढ़ने से वे नियमों का पालन करने के लिए मजबूर होंगे, जिससे बाजार में अनुशासन स्थापित होगा। इससे न केवल खरीदारों को फायदा होगा, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर की छवि भी सुधरेगी।
स्थानीय स्तर पर भी इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है। कई उपभोक्ता संगठनों ने इसे एक सकारात्मक पहल बताया है और कहा है कि इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर मध्यम वर्गीय परिवार, जो अपनी जीवन भर की कमाई से घर खरीदते हैं, उनके लिए यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण है।
(नोट: घर या प्लॉट खरीदने से पहले संबंधित प्रोजेक्ट का रेरा रजिस्ट्रेशन अवश्य जांच लें और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें।)
Original Source - Patrika Live News
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